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पर्यटक स्थल, पुरातत्व स्थल एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी पुण्य सलिल शिवना के दक्षिण तट पर बना अष्टमुखी पशुपतिनाथ महादेव का मंदिर इस नगर के प्रमुख आकर्षण का केन्द्र है। अष्टमुखी शिवतिंग की यह एक प्रतिमा है । आग्नेय शिला के दुर्लभ खण्ड पर निर्मित यह प्रतिमा किसी अज्ञात कलाकार की अनुपम कति है जो सदियों पूर्व शिवना नदी की गोद में समा गई थी । 2.5 * 3.20 मीटर आकार की इस प्रतिमा का वजन 46 क्विंटल 65 किलो है । मंदसौर नगर के प्रमुख आकर्षण का केन्द्र पशुपतिनाथ मंदिर है । मंदिर में प्रतिष्ठित अष्टमुखी शिवतिंग शैलीगत आधार पर गुप्त कालीन है । शिव के आठ रूप भव, पशुपति, महादेव, ईशान, रूद्र, शर्व, उग्र एवं अर्शान का मुख कणों में सुन्दर आलेखन है। |
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धर्मराजेश्वर तहसील गरोठ धर्मराजेश्वर में गुफा में स्थित मंदिर में बलुआ पहाड को काटकर विष्णु मंदिर बनाया गया जिसे बाद में शिव मंदिर का रूप दिया गया । पहाड काटकर बौध्द गुफाएँ, चैत्य विहार एवं बुध्द प्रतिमाएँ बनाई गई है । गुफाऍं शामगढ से 12 किलोमीटर सडक मार्ग की दूरी पर है। भीमबैठका एवं गुफा में स्थित स्तूप भी दर्शनीय है। गुफा में स्थित मंदिर को एक ही चटृटान को काटकर बनाया गया है। |
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पोलाडुंगर तहसील गरोठ बौध्द गुफाएँ, स्तूप, हनुमानजी का स्थान आदि है। यह स्थान 7 8 वीं शताब्दी का होकर गरोठ से 10 किलोमीटर की दूरी स्थित है। यहॉं का प्राकृतिक सौन्दर्य भी अत्यंत रमणीय है ।
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चामुण्डा माता मंदिर तहसील गरोठ माताजी का स्थान, ग्रामीणों की श्रध्दा का केन्द्र जहॉं प्रतिवर्ष नवरात्रि में मेला लगता है। गंतव्य स्थल तक जाने के लिए कच्चा रास्ता शामगढ से 6 किलोमीटर दूरी पर है।
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परासली
तीर्थ तहसील शामगढ
परासली छोटा सा कस्बा है जहॉं जैन श्रावक का नही है। देवविमान सम जिनालय में विराजमान श्री आदिनाथ भगवान एवं 23 अन्य प्रतिमाऍं है। यह शांत रमणीय साधना का केन्द्र है। दूर दूर से दर्शनाथी यहॉं आते है। यहॉं फाल्गुन शुक्ल 8 एवं 9, कार्तिक पूर्णिमा एवं अक्षय तृतीया को उत्सव मनाया जाता है जिसमें दूर दूर से उपासक आते है। यहॉं चमत्कारिक घटनाऍं भी देखी जाती है। शामगढ से 10 किलोमीटर डामर रोड द्वारा पहुँचा जा सकता है। |
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छत्री तहसील गरोठ श्री यशवंत राव कोठरी की छत्री कस्बा गरोठ में स्थित है। प्राचीन मंदिर, पंचवन, गौशाला, प्राचीन बावडी आदि यहॉं रमणीय स्थान है ये गरोठ से 12 किलोमीटर की दूरी स्थित है।
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श्री कालेश्वर मंदिर तहसील गरोठ प्राचीन मंदिर है यहॉं नवरात्रि में मेला लगता है। सॉंप के काटने का जहर उतारने तथा शादियों के लिए पाती लग्न देने के लिए यह स्थल प्रसिध्द है। उक्त मंदिर 12वीं एवं 13वीं शताब्दी का है।
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श्री शंखोद्वार तहसील गरोठ कार्तिक नवरात्रि में मेला लगता है ग्रामीणजन अपने पूर्वजों का तर्पण करते है।
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श्री नीलकंठेश्वर महादेव, मलकाना आश्रम, तहसील गरोठ श्रावण मास में दर्शनार्थी आते है एवं श्रावणी अमावस्या को मेला लगता है। तालाब में कुमुदनी फूल खिलते है।
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श्री अंबे माता मंदिर तहसील गरोठ पुराना मंदिर होकर पहाड पर होने से अच्छा पर्यटन स्थल है।
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